Monday, 24 October 2016

2-457 बहुत सी बातें ज़हन

बहुत सी बातें ज़हन में आतीं हैं तब ही,
चिकनी खाल पे झुर्रियां जब पड़ जाती हैं


कागज़ के फूलों में खुशबू आती है तब ही,
इत्र की छींटें उन पर जब बिखर जातीं हैं।..(वीरेंद्र)/2-457


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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