Monday, 24 October 2016

2-456 देश का सबसे बड़ा

देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य,
आज इसमें गद्दार बहुत है,
बाहरी शत्रु से जीता ये हमेशा,
पर अपनों से खाई मार बहुत है..(वीरेंद्र)/2-456


रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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