Wednesday, 19 October 2016

2-453 वतनपरस्ती की बात

वतनपरस्ती की बात करने में भी अब लोग कतराने लगे हैं,
गद्दारों को देखो, कितनी हिम्मत से वो गद्दारी करने लगे हैं..(वीरेंद्र)/2-453


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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