Wednesday, 19 October 2016

2-445 गद्दार की जुबां में

ग़द्दार की ज़ुबान में इतना जो ज़ोर है,
कानून का डंडा क्या इतना कमज़ोर है,
मुरव्वत किस बात की, ऐसे के साथ में,
जो शख्स बे-हया बे-गैरत हरामखोर है..(वीरेंद्र)/2-445


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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