Sunday, 9 October 2016

2-435 मारते रहेंगे तेरे

मारते रहेंगे तेरे भेजे हर फिदायीन को, 
यूँही वीराँ कर देंगे हम तेरी ज़मीन को,
हैवानियत खूंरेज़ी हमारा मक़सद नहीं,
मगर कैसे रोकूँ इन्साफ की संगीन को..(वीरेंद्र)/2-435


रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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