Sunday, 30 October 2016

1-817 अब और बेरुखी दिखने की

अब और बेरुखी दिखाने की कोशिश न कर मुझसे,
तेरी हर कोशिश से मेरी मोहब्बत को हवा मिल रही है..(वीरेंद्र)/1-817


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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