Sunday, 30 October 2016

1-816 'अजनबी' बना रहने दे

'अजनबी' बना रहने दे मुझे, मुझसे आशना न हो,
तेरा बनकर मैं मतलबी हो जाऊं कहीं ऐसा न हो..(वीरेंद्र)/1-816


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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