Sunday, 30 October 2016

1-815 दिल के जज़्बात-ओ-एहसासात

दिल के जज़्बात-ओ-एहसासात में डूब जाने की ज़रुरत होती है,
शायरी को समझने की नहीं, महसूस करने की ज़रुरत होती है..(वीरेंद्र)/1-815


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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