Monday, 17 October 2016

1-813 "जब गमे-इश्क सताता है"

'जब ग़मे-इश्क़ सताता है तो' आईने को ढक देता हूँ,
निकाल के हसीं दिनों की तस्वीर सामने रख लेता हूँ..(वीरेंद्र)/1-813


रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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