Sunday, 9 October 2016

1-808 आँख बंद कर लेने से

आँख बंद कर लेने से हक़ीक़त छुप नहीं जाती,
ये और बात है आँख खुलने तक नज़र नहीं आती..(वीरेंद्र)/1-808

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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