Tuesday, 25 October 2016

0-573 बुझे चिराग का यह धुआं

बुझे चराग़ का यह धुआं बता रहा है,
अभी अभी ख़त्म हुई है दास्ताँ कोई,
तन्हाई में लिपटा सन्नाटा जता रहा है,
अभी अभी यहाँ से गुज़रा है तूफ़ाँ कोई..(वीरेंद्र)/0-573


©रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

No comments:

Post a Comment