Sunday, 23 October 2016

0-572 बहुत समझाया, बहुत टोका

बहुत समझाया, बहुत टोका ज़माने ने
मुहब्बत करने से बहुत रोका ज़माने ने,
फ़ना होने का शौक था, फ़ना होकर रहे,
ना उसने रोका हमें, ना रोका ज़माने ने..(वीरेंद्र)/0-572


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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