Monday, 19 September 2016

2-440 ऐसे लोगों को गले


ऐसे लोगों को गले लगाते हो क्यों,
जो खुद को सिकंदर समझते हों,
उनको इस कदर छूट देते हो क्यों,
जो खुदको तीसमारखां समझते हों।
कर दो नेस्त नाबूद ऐसे एहमकों को,
जो इंसानियत की ज़ुबाँ न समझते हों..(वीरेंद्र)/2-440

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"


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