Friday, 30 September 2016

2-448 चंद गद्दार शाद हुए

चंद ग़द्दार शाद हुएे, जिस रोज़ हमारे जांबाज़ जवान हलाक हुए, वतनपरस्त खुश है आज, वो दहशतगर्द ज़िन्दगी से आज़ाद हुए..(वीरेंद्र)/2-448

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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