Tuesday, 27 September 2016

2-441 हालात इतने बदतर

हालात इतने बदतर हो गए कि,
मुल्क के खिलाफ गैर-मुल्की तो कम,
मुल्क के कुछ दानिशमंद ज़्यादा बोल रहे हैं,
वतनपरस्तों का दर्द बढ़ने लगा जब,
चंद मुंतज़िरे-हुकूमत भी वही बोलने लगे जो,
दहशतगर्द अल्हेदगीपसंद रोज़ाना बोल रहे हैं..(वीरेंद्र)/2-441

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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