Tuesday, 13 September 2016

2-440 ना नगरपालिका मेरा

ना नगरपालिका मेरा अवैध कब्ज़ा ढहाती,
ना खुदको भ्रष्टाचारी या रिश्वतखोर कहाती.
मुझे कहाँ था इनकार, मै रिश्वत दे भी देता,
अगर ये सरकार मुझे अपना दामाद बनाती..(वीरेंद्र)/2-440


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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