Tuesday, 13 September 2016

2-432 हिंदी, तुम सही बोलीं

हिंदी, तुम सही बोलीं इस देश में गंगा है उलटी बहने लगी,
तुम पराई सी हो गईं जबसे आकर यहाँ विदेशी रहने लगी,
किन्तु तुम देश की माटी की खुशबू हो, भारत की आत्मा हो,
तुम व्यर्थ आशंका आत्महीनता सी क्यों महसूस करने लगी.


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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