Monday, 19 September 2016

2-424 किसी का क्या कसूर

किसी का क्या कसूर जब लग रही हो आग घर के चरागों से,
दुश्मन से तो निपट ले कोई, कैसे निपटें घर में छिपे गद्दारों से..(वीरेंद्र)/2-423


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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