Monday, 19 September 2016

2-423 अब तो जुबां खोलते

अब तो जुबान खोलते भी डर लगता है,
न जाने कौन इसको लम्बी करार दे दे..(वीरेंद्र)/2-423

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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