Saturday, 17 September 2016

2-422 खुदा की मर्ज़ी के सामने

खुदा की मर्ज़ी के सामने लोग अपना सर झुका रहे हैं,
किसी को ज़ुबाँ नहीं मिलती, तो कुछ इसे कटवा रहे हैं..(वीरेंद्र)/2-422 


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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