Tuesday, 13 September 2016

1-805 इस तन्हाई में क्यूं

इस तन्हाई में क्यूँ याद करता हूँ मैं उन अपनों को,
गैरों की भीड़ में जिन्होंने मुझे कभी पहचाना नहीं..(वीरेंद्र)/1-805


©रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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