Tuesday, 13 September 2016

1-804 नजदीकियों का भी कोई

नजदीकियों का भी कोई क्या करे,
तन्हाइयां जिसकी आदत हो गईं हों..(वीरेंद्र)/1-804


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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