Tuesday, 13 September 2016

1-803 मुझे आज भी याद हैं

मुझे आज भी याद हैं अपनी मुफलिसी के दिन,
हसीं थी ज़िंदगी मिल बैठके गुज़र जाते थे तंगी के दिन..(वीरेंद्र)/1-803


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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