Tuesday, 13 September 2016

1-802 मै भी खुदगर्ज़ हवाओं

मै भी खुदगर्ज़ हवाओं का रुख मोड़ना चाहता हूँ
किसी बेवफा हसीं का दिल अब तोडना चाहता हूँ.(वीरेंद्र)/1-802
रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी" 

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