Wednesday, 29 June 2016

0-430 बरखा की बूँदें मुख मंडल पर

बरखा की बूँदें मुख-मंडल पर,
खेलती उमंगें मन चंचल पर,
कारे मेघा बरस कर चले गए,
हरियाली बिखरी धरातल पर..(वीरेंद्र)/0-430

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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