Wednesday, 29 June 2016

1-798 समझा न सका ज़माने को,

समझा न सका ज़माने को, तो चुप हो गया,
हार गए दर्द मुझसे, मै जबसे बेखुद हो गया..(वीरेंद्र)/1-798

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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