Wednesday, 8 June 2016

0-567 टर्र टर्र करने वाले यूं

टर्र टर्र करने वाले यूँ तो बरसाती ही हैं,
पर जीने का हक़ तो उन्हें भी मिला है,
टर्र टर्र करते हैं, बिगाड़ते कुछ भी नहीं,
मगर लोगों को उनसे इसमें भी गिला है..(वीरेंद्र)/0-567

रचना: वीरेंद्र सिन्हा"अजनबी"

No comments:

Post a Comment