Wednesday, 8 June 2016

0-565 कोई रात ऐसी आती है,

कोई रात ऐसी आती है,आँख को नींद मिलती नहीं,
कोई नींद भी ऐसी आती है, आँख कभी खुलती नहीं, 
इंसान बड़ा बे-इख्तियार सा है अपनी ही ज़िन्दगी में,
इसमें मर्ज़ी सिवा खुदा के किसी की भी चलती नहीं..(वीरेंद्र)/0-565

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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