Wednesday, 8 June 2016

1-796 बुलंदी पे जाकर अपनी

बुलंदी पे जाकर अपनी चंद खूबियों पर इतना न कूदा कर,
ज़मींन पर आकर ज़रा अपनी खामियां भी देख लिया कर..(वीरेंद्र)/1-796

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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