Wednesday, 8 June 2016

0-564 इधर करवट ले, चाहे उधर

इधर करवट ले, चाहे उधर करवट लेले,
थोडा सा ही जिंदगी में आराम मिलेगा,
ओढेगा जब मिटटी की चादर बदन पर,
तब ही मुस्तकिल तुझे आराम मिलेगा..(वीरेंद्र)/0-564

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment