Sunday, 22 May 2016

2-420 मीठा झूंट भी बोल

मीठा झूंट भी बोल लिया कर कभी-कभी,
क्यों कड़वा सच बोलके अपनों को खोता जाता है..(वीरेंद्र)/2-420


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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