Sunday, 22 May 2016

1-794 इतनी तो मुहब्बत थी

इतनी तो मुहब्बत थी मेरे कातिल को मुझसे,
क़त्ल करके भी मुझको, छाँव में डाला उसने..(वीरेंद्र)/1-794


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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