Sunday, 22 May 2016

1-792 इतनी भी ख्वाहिशें

इतनी भी ख्वाहिशें पूरी न करना मेरी,
कि ये ज़िन्दगी बे-ख्वाहिश सी हो जाए..(वीरेंद्र)/1-792


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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