Sunday, 22 May 2016

1-791 अब ना रहा कोई इमकान

अब ना रहा कोई इम्कान उसके लौट कर आने का,
पर जाने कब होगा यकीं दिल को, ये मान जाने का..(वीरेंद्र)/1-791


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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