Saturday, 21 May 2016

1-789 मंजिल भी दूर है

मंजिल भी दूर है, सफ़र है लम्बा बाकी,
कुछ और दोराहे सफ़र में हैं आना बाकी..(वीरेंद्र)/1-789

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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