Monday, 9 May 2016

1-787 गुज़रे हैं हम राह से,

गुज़रे हैं हम राह से, पत्थर हटा हटा कर,
के हमारे बाद वाले की राह आसान हो..(वीरेंद्र)/1-787


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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