Thursday, 5 May 2016

1-784 मेरा दिल तोड़कर

मेरा दिल तोड़ कर वो बेरहम तो बड़े आराम से सोया होगा,
उसे क्या मालूम दिल टूटा जिसका, वो कितना रोया होगा..(वीरेंद्र)/1-784


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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