Thursday, 5 May 2016

0-554 किस का दिल रक्खे,

किस का दिल रक्खे, किस का तोड़ डाले ये बादल,
इसके घिर आने से कोई खुश है तो कोई है घायल,
किसी का टूटा आशियाना, किसी का सूखा है खेत,
प्रकृति कैसे भेदभाव करे, पूरा प्रिय है उसे धरातल..(वीरेंद्र)/0-554


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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