Tuesday, 19 April 2016

2-419 सुधर जाती है हर भूल

सुधर जाती है हर भूल,
निकल जाते हैं सब शूल,
आचरण करो निष्पाप,
चढ़ाओ ईष्टदेव पर फूल.
ईश्वर बड़ा अन्तर्यामी है,
दृष्टि उसकी दूरगामी है,
छल न सकोगे उसको,
वो तो त्रिलोक स्वामी है.
मानवता ही पूजा है,
दान पुण्य ही पूजा है,
करो असहाय की सेवा,
इस जैसा धर्म न दूजा है..(वीरेंद्र)/2-419

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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