Tuesday, 19 April 2016

2-414 तू तो तेज़-तेज़ चलती जा

तू तो तेज़-तेज़ चलती जा रही है,
मुझसे आगे निकलती जा रही है,
तू मेरी है, मेरा साथ दे ऐ ज़िंदगी,
क्यों हाथ से फिसलती जा रही है..(वीरेंद्र)/2-414


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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