Sunday, 17 April 2016

2-410 दिल-परिवर्तन किसी काम

दिल-परिवर्तन किसी काम न आया,
आ बेवफा हम भी कर लें "घर-वापसी"..(वीरेंद्र)/2-410


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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