Wednesday, 6 April 2016

2-407 रंगों की मुझे पहचान


रंगों की मुझे पहचान नहीं, बस एक ही रंग भाये,
जिसपर चढ़ा हो रंग मेरा, बस मुझे वही रंग भाये..(वीरेंद्र)/2-407


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment