Monday, 11 April 2016

2-405 लात, घूँसा, चप्पल, जूता

लात, घूँसा,चप्पल, जूता आज के सम्मान,
जो जितने खाये, बस वही नेता बने महान,
मीडिया में अच्छों का कोई नाम-लेवा नहीें,
धूर्त कौओं को टीवी पर रोज़ मिले स्थान..(वीरेंद्र)/2-405


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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