Tuesday, 5 April 2016

2-404 शहर हैं जहाँ, वहां जंगल

शहर हैं जहाँ, वहां जंगल हुआ करते थे,
टावर हैं जहाँ, वहां शजर हुआ करते थे,
सूख रहे अब नदी,नाले,झरने धीरे-धीरे,
सूखा है,जहाँ सब्ज़ मंज़र हुआ करते थे..(वीरेंद्र)/2-404


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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