Thursday, 21 April 2016

1-783 तजुर्बेकार और पुरकैफ

तजुर्बेकार और पुरकैफ़ हो जाती है ज़िन्दगी,
जब ठोकरों से असल तालीम पाती है ज़िन्दगी..(वीरेंद्र)/1-783


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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