Sunday, 17 April 2016

1-782 भरी जवानी में ये ग़मों का

भरी जवानी में ये ग़मों का तूफ़ान, ये सैलाबे-अश्क आया कहाँ से,
मैंने लफ़्ज़े-मुहब्बत सुना भी नहीं,फिर जुनूने-इश्क आया कहाँ से..(वीरेंद्र)/1-782


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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