Wednesday, 6 April 2016

1-776 तमाम उम्र को सकूं

तमाम उम्र का सकूं गया,
वक्ती ख़ुशी पे मै क्यूं गया...(वीरेंद्र)/1-776


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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