Saturday, 9 April 2016

1-775 दौरे-जदीद में ज़िन्दगी

दौरे-जदीद में ज़िन्दगी जीने का हुनर चाहिए,
अब कहाँ से लाऊं, उसे पाने को भी उमर चाहिए..(वीरेंद्र)/1-775


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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