Tuesday, 5 April 2016

1-773 वैसे तो मै पत्थर हूँ,

वैसे तो मै पत्थर हूँ, मगर अक्सर पिंघल जाता हूँ मै,
ज़रा ध्यान रखना, आतिशे-हुस्न से जल जाता हूँ मै..(वीरेंद्र)/1-773


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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