Saturday, 2 April 2016

1-771 कहते हैं, ज़िन्दगी तू नहीं

कहते हैं, ज़िन्दगी तू नहीं मिलती दोबारा,
फिर मौत इंसा को क्यों बार-बार मिल जाती है..(वीरेंद्र)/1-771


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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